2025 में भारत में रोजगार और बेरोजगारी की स्थिति पर विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट
2025 में भारत में रोजगार और बेरोजगारी की स्थिति पर विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2025 में भारत की बेरोजगारी दर 5.2% पर आ गई, जो जून 2025 की 5.6% दर से कम है। यह गिरावट रोजगार के मोर्चे पर सकारात्मक संकेत है और भारत के आर्थिक वातावरण में सुधार की ओर इशारा करती है। अप्रैल 2025 में बेरोजगारी दर 5.1% थी, जो पिछले वर्षों की तुलना में एक आशाजनक आंकड़ा है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार – प्रमुख तथ्य
ग्रामीण भारत रोजगार वृद्धि का मुख्य केंद्र बना हुआ है। जुलाई 2025 में ग्रामीण बेरोजगारी दर 4.4% रहने के साथ-साथ श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) 56.9% दर्ज की गई। कृषि और मनरेगा जैसे ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम यहां मुख्य रोजगार स्रोत बने हैं।
वहीं शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर जुलाई में बढ़कर 7.2% हो गई, जो मुख्यतः युवा बेरोजगारी और अस्थायी नौकरियों की कमी के कारण है। युवा (15-29 वर्ष) वर्ग में शहरी बेरोजगारी 19% तक पहुंच चुकी है, जो चिंता का विषय है। शहरों में सर्विस सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल सेक्टर में रोजगार के अवसर बढ़े हैं, परन्तु स्थायी रोजगार की कमी बनी हुई है।
श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) व अन्य संकेतक
जुलाई 2025 में कुल श्रम बल भागीदारी दर 54.9% रही, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र का योगदान 56.9% और शहरी 50.7% था। कार्यकर्ता जनसंख्या अनुपात (WPR) ग्रामीण क्षेत्र में 54.4% जबकि शहरी क्षेत्र में 47% है। महिलाओं की श्रम भागीदारी ग्रामीण क्षेत्रों में 36.9% और शहरी क्षेत्रों में 23.5% रही, जो पिछली तिमाही के मुकाबले बढ़ोतरी दर्शाती है।
रोजगार सृजन और क्षेत्रीय विविधता
2017-18 से 2023-24 के बीच भारत में कुल रोजगार 47.5 करोड़ से बढ़कर 64.33 करोड़ हो चुका है। नए रोजगार अधिकांशतः गैर-कृषि क्षेत्र से आए हैं, जो अर्थव्यवस्था के विविधीकरण का संकेत है। राज्यों के अनुसार, केरल में युवा बेरोजगारी उच्च स्तर (29.9%) पर है जबकि मध्य प्रदेश में यह सबसे कम (3.2%) है। लाक्षद्वीप, अंडमान-निकोबार जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में युवाओं में बेरोजगारी अधिक देखने को मिल रही है।
सरकार की नीतियां और आगे की चुनौतियां
सरकार ने रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास, MSME क्षेत्र को प्रोत्साहन और स्टार्टअप कल्चर को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। मनरेगा जैसे ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम से ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार बेहतर हुआ है।
फिर भी, शहरी क्षेत्रों में स्थायी रोजगार की कमी और युवाओं में बेरोजगारी बड़ी चुनौती बनी हुई है। महिला श्रम भागीदारी बढ़ाने के लिए भी विशेष प्रयास आवश्यक हैं। भविष्य में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को तेज करने से रोजगार के और अवसर बढ़ सकते हैं, जिससे बेरोजगारी में निरंतर कमी आएगी और अर्थव्यवस्था का स्थिर विकास होगा।
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