लखनऊ सहित प्रदेश में डग्गामार बसें पूरी तरह बंद होंगी: अवैध बसों पर सख्त कार्रवाई शुरू
डग्गामार बसे बंद होंगी: सरकारी परिवहन का बचाव और अवैध टैक्सी-मिनी बसें खत्म करने का अभियान
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत आसपास के जिलों में डग्गामार बसों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। डग्गामार बसें मुख्यतः बिना अनुमति, सरकारी नियमों का उल्लंघन करते हुए यात्रियों की अवैध रूप से ढुलाई करती हैं, जिससे न केवल रोडवेज की कमाई प्रभावित होती है बल्कि यात्रियों की सुरक्षा को भी बड़ा खतरा होता है।
अवैध डग्गामार बसों पर प्रदेश सरकार का सख्त रवैया
हालिया महीनों में परिवहन विभाग ने डग्गामार वाहनों के खिलाफ मेगा अभियान चलाया है, जिसमें:
30 से अधिक डग्गामार बसें और अवैध टैक्सी सीज की गईं, जिनमें लखनऊ के अहमामऊ, कमता, मड़ियांव-भिटौली-सीतापुर मार्ग और अवध बस स्टेशन के आसपास प्रमुख इलाके शामिल हैं।
कई बसों के चालान भी किए गए हैं जिन पर लाइसेंस, परमिट और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया गया।
अधिकारियों ने निर्देश दिए गए हैं कि बिना परमिट वाली या मंजूर रूट से हटकर चलने वाली बसों को कोई बख्शा नहीं जाएगा।
रोडवेज कर्मियों का विरोध और सड़क पर आंदोलन
राहगीरों और सरकारी कर्मचारियों दोनों को हो रही परेशानी के कारण रोडवेज के कर्मचारी भी डग्गामार बसों के विरोध में आवाज उठा रहे हैं।
लखनऊ के अवध बस स्टेशन पर कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर “डग्गामार हटाओ, रोडवेज बचाओ” के नारे लगाकर सड़कों पर आवाज बुलंद की।
आंदोलनकारी कहते हैं कि डग्गामार बसें ना केवल आर्थिक नुकसान कर रही हैं बल्कि कानूनी नियमों का उल्लंघन कर यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डाल रही हैं।
कर्मचारियों ने कई वीडियो और सबूत प्रशासन को सौंपे हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा जा रहा है।
प्रशासनिक पहल और आरटीओ की कड़ी कार्रवाई
परिवहन विभाग के प्रवर्तन दल दैनिक रूप से अवैध बसों के खिलाफ छापेमारी कर रहा है।
आरटीओ प्रवर्तन प्रभारी ने कहा कि लखनऊ में लगातार जांच जारी है, और वाहनों के परमिट रद्द कर उन्हें डिपो में रख दिया गया है।
डग्गामार बसों के मुंह बंद करने के लिए पुलिस प्रशासन भी सहयोग कर रहा है।
प्राथमिकता उन बस स्टेशनों की है जहां डग्गामार बसों का जमावड़ा ज्यादा होता है।
डग्गामार बसों के दुष्प्रभाव और आवागमन की समस्या
डग्गामार बसें बिना फिटनेस सर्टिफिकेट, यात्रा बीमा, और तकनीकी जांच के सड़कों पर दौड़ती हैं।
ये बसें अक्सर गैर-मानक नंबर प्लेट और अनियमित आवाजाही के कारण दुर्घटना के बड़े कारण बनती हैं।
यात्रियों को सही सेवा नहीं मिलती, लेकिन वे मजबूरी में इन बसों का उपयोग करते हैं क्योंकि अक्सर सरकारी रोडवेज की बसें कम होती हैं।
सड़कों पर ट्रैफिक जाम, आवाज प्रदूषण और यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है।
आगे की रणनीति और जनता से अपील
सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए डग्गामार बसों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई है।
यात्रियों से अनुरोध है कि वे केवल वैध और सरकारी बसों का ही उपयोग करें ताकि ट्रैफिक नियमों का पालन हो और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो।
रोडवेज कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे न केवल डग्गामार को रोकें बल्कि सरकारी बस सेवा का विस्तार भी करें।
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