यूपी में ‘ऑपरेशन टॉर्च’ का खौफ: रातों-रात गायब हुए सैकड़ों संदिग्ध, 75 जिलों में योगी पुलिस का ‘सर्च अभियान’ शुरू
(लखनऊ/सीतापुर – ब्यूरो रिपोर्ट):
उत्तर प्रदेश में अवैध घुसपैठियों (Illegal Infiltrators) के खिलाफ योगी सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा अभियान छेड़ दिया है। इसे नाम दिया गया है—‘ऑपरेशन टॉर्च’ (Operation Torch)।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बाद प्रदेश के सभी 75 जिलों में पुलिस एक्शन मोड में आ गई है। इस अभियान का मकसद बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें डिपोर्ट (Deport) करना है।
क्या है ‘ऑपरेशन टॉर्च’?
इस अभियान का नाम ‘टॉर्च’ इसलिए रखा गया है क्योंकि पुलिस टीमें रात के अंधेरे में टॉर्च की रोशनी लेकर झुग्गी-झोपड़ियों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और निर्माणाधीन इमारतों की तलाशी ले रही हैं। पुलिस का मानना है कि दिन में काम पर निकलने वाले संदिग्ध रात को ही अपने ठिकानों पर मिलते हैं।
लखनऊ और वाराणसी में दिखा बड़ा असर
इस अभियान का असर दिखना शुरू हो गया है:
- लखनऊ: नगर निगम में काम करने वाले 160 संविदा कर्मचारी अचानक गायब हो गए हैं। जैसे ही उनसे आईडी प्रूफ (ID Proof) मांगा गया, उन्होंने काम पर आना बंद कर दिया। जांच में पता चला है कि इनमें से कई के आधार कार्ड असम और पश्चिम बंगाल के पते पर बने थे।
- वाराणसी: पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में पुलिस ने 500 से अधिक संदिग्धों को चिह्नित किया है।
- सहारनपुर: यहाँ भी पुलिस ने 35 संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।
किरायेदारों का भी हो रहा सत्यापन
पुलिस अब सिर्फ झुग्गियों में ही नहीं, बल्कि रिहायशी इलाकों में भी सत्यापन (Verification) कर रही है। मकान मालिकों को सख्त हिदायत दी गई है कि बिना पुलिस वेरिफिकेशन के किसी को भी किराये पर कमरा न दें, वरना उन पर भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
डिटेंशन सेंटर की तैयारी
खबर है कि पहचान किए गए अवैध घुसपैठियों को रखने के लिए राज्य सरकार कई जिलों में डिटेंशन सेंटर (Detention Centers) बनाने की योजना पर भी काम कर रही है।
(ब्यूरो रिपोर्ट – द डिवाइन यूथ)
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