May 23, 2026 |
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श्री कृष्ण जन्माष्टमी की मची धूम, खुशी से भारतवासी रहे झूम

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द डिवाइन यूथ! दिन बुधवार रोहिणी नक्षत्र को जन्मे भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव आज पूरी श्रष्टि धूमधाम से मना रही है| 64 कलाओं के स्वामी तथा गीता का अद्भुत ज्ञान देने वाले भगवान श्री कृष्ण सनातन धर्म में सर्वश्रेष्ठ मान्यता रखने वाले भगवान हैं| भगवान श्री कृष्ण का जीवन श्रेष्ठ आदर्शों से परिपूर्ण है| प्रेम की उच्च शिक्षा देने वाले भगवान कृष्ण कहते हैं कि जिन्हें प्रेम करो उनकी रक्षा हेतु यदि युद्ध भी करना पड़े तो युद्ध करके भी उनकी रक्षा करो| बृजवासियों के ह्रदय में बसते भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र के अहंकार से बृजवासियों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी ऊँगली पर उठा लिया था| कालिया नाग के फन पर नृत्य करने वाले वाले लीलाधारी भगवान श्री कृष्ण ने मनुष्य के उत्साहवर्धन के लिए तथा उन्हें सही शिक्षा देने के लिए अपने जीवन में विद्यापूर्वक निरंतर संघर्ष किया तथा हर संघर्ष में विजयी हुए| योगेश्वर भगवान योगियों के श्रेष्ठ मार्गदर्शक हैं| उन्होंने पहले मुरली से सबके ह्रदय को आनंदविभोर किया और जिन्हें मुरली की भाषा समझ में न आई उन अहंकारी अधर्मियों को सुदर्शन चक्र से नियंत्रित किया| भगवान ने महाभारत के युद्ध से पूर्व शांतिदूत भगवान श्री कृष्ण की भूमिका निभाई| शांति और प्रेम की भाषा अहंकारी अधर्मियों की समझ से बाहर थी| विनम्रता का अर्थ जब अधर्मियों ने निर्बलता निकाला तब भगवान ने उन्हें अपना विश्वरूप दिखाकर अधर्मियों के संदेह को दूर किया कि प्रेम तथा विनम्रता का अर्थ निर्बलता नहीं है| अपने अतिरिक्त भगवान ने सत्य तथा धर्म का अनुपालन करने वाली समस्त श्रष्टि पर विश्वास किया| विश्वास, ज्ञान तथा उत्साहवर्धन भगवान की वे परम शक्तियां थी जिन्हें भगवान ने अपने जीवन के सबसे बड़े युद्ध में प्रमुख शस्त्र बनाया| उन्होंने पांडवो की शक्ति पर विश्वास किया तथा महाभारत के युद्ध में स्वयं शस्त्र न उठाने का निर्णय लिया| युद्ध क्षेत्र में भी भगवान ने पूरा आनंद लिया| वे अर्जुन के सारथी बने| जब अर्जुन मोह से निर्बल हुए तब भगवान ने अर्जुन को गीता का अद्भुत ज्ञान दिया| भगवान ने कुशल योजनाकार तथा श्रेष्ठ संचालक की भूमिका निभाई| अभिमन्यु संकट में थे ये भगवान को विदित था पर भगवान जीवन मृत्यु के मोहपाश से परे थे| जिस प्रकार से भगवान ने प्रत्यक्ष होकर द्रौपदी की रक्षा की थी उसी प्रकार वे अभिमन्यु की रक्षा भी कर सकते थे| परन्तु अभिमन्यु के निवेश से धर्म युद्ध में धर्म के योद्धाओं में विजय हेतु आवश्यक आवेश उत्पन्न होना संभव था अतः भगवान ने उस समय अभिमन्युरूपी ऊर्जा को निवेशित होने दिया| भगवान के लिए जीवन मृत्यु ऊर्जा के सदुपयोग तथा ऊर्जा के निवेश से अतिरिक्त कुछ भी नहीं है| वो ऊर्जा जिसकी अधिकतम संघनित अवस्था स्वयं भगवान ही है तथा जिसका कण कण भी भगवान स्वयं ही हैं| ये भगवान का दीर्घकालिक निवेश था| इस निश्चय में कि कलियुग के किसी कठोर काल जब ऊर्जा की सर्वाधिक आवश्यकता होगी तब अभिमन्यु इस देश की युवा शक्ति में सार्वभौमिक रूप से जागृत होंगे| बर्बरीक से जब प्रश्न हुआ कि युद्ध में सभी की कुशलताओं के बारे में वे बताएं तब बर्बरीक ने बहुत सुन्दर उत्तर दिया| उन्होंने कहा कि बाकी सब तो बस हथियार और धनुष बाण चला रहे थे लेकिन वास्तव में सबको भगवान श्री कृष्ण ही अपने सुदर्शन चक्र द्वारा मार रहे थे। इसलिए महाभारत के सबसे महान योद्धा तो भगवान श्री कृष्ण ही हैं। अप्रत्यक्ष रहकर भी प्रत्यक्ष रहने वाले भगवान ने अपनी उत्तम संघर्ष रूपी लीलाओं के माध्यम से मनुष्य को अद्वितीय शिक्षा दी है तथा अनुपम मार्गदर्शन किया है| जीवन में कब शास्त्र की आवश्यकता है तथा कब शास्त्र के अंतर्गत शस्त्र की ये भगवान के जीवन से सीखा जा सकता है| चेतना तथा जागरूकता के साथ हर कठिन संघर्ष का आनंद भी उठाया जा सकता है ये भगवान के जीवन से सीख सकते हैं| सीमित तथा स्वार्थी हो चुके मनुष्य को भगवान से सीखना चाहिए कि वे असीमित श्रष्टि का चिंतन करें| ऐसा करके आप असीमित श्रष्टि को भी अपने लिए अधिक कर्तव्यनिष्ठ करते हैं|

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