प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चीन दौरा और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक चीन के तियानजिन में हो रहा है! यह मोदी का पिछले 7 वर्षों में चीन का पहला दौरा है, जिसका उद्देश्य भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक प्रगति और क्षेत्रीय व वैश्विक स्थिरता को बढ़ावा देना है।
विस्तृत रिपोर्ट: प्रधानमंत्री मोदी का चीन दौरा और एससीओ शिखर सम्मेलन 2025
प्रधानमंत्री मोदी ने तियानजिन पहुँच कर एससीओ के 22वें शिखर सम्मेलन में भाग लिया, जिसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित 10 सदस्य देशों के नेता शामिल हुए। इस सम्मेलन का आयोजन चीन की अध्यक्षता में हुआ।
द्विपक्षीय मुलाकात: मोदी-शी जिनपिंग
मोदी और शी जिनपिंग के बीच लगभग 40 मिनट तक की बैठक हुई, जो पिछले अक्टूबर 2024 में रूसी शहर कजान में हुई बैठक के बाद पहली थी। बैठक में दोनों नेताओं ने सीमा विवाद के समाधान में हुए कदमों की समीक्षा की। उन्होंने सीमा पर शांति बनाये रखने, व्यापार और पर्यटकों के लिए वीजा नीतियों में सुधार, तथा सीधे उड़ानों के पुनः संचालन पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों को ‘विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता’ के आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाना चाहिए। यह घोषणा 2020 के गलवान घाटी विवाद के बाद तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत थी।
आर्थिक और रणनीतिक पहल
एससीओ की बैठक के दौरान मोदी ने कहा कि भारत और चीन, दोनों विश्व के बड़े अर्थव्यवस्था हैं, जो वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए साथ काम कर सकते हैं। उन्होंने अमेरिकी व्यापार टैरिफों का उदाहरण देते हुए कहा कि क्षेत्रीय सहयोग इस प्रकार के वैश्विक दबावों से निपटने में मददगार होगा। भारत और चीन के बीच पुनः आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देते हुए कई समझौतों और बहुपक्षीय परियोजनाओं पर चर्चा हुई।
एससीओ में वैश्विक राजनीति
एससीओ सदस्यों ने आतंकवाद, सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, और सुदूर पूर्व एशिया में स्थिरता सहित व्यापक मुद्दों पर चर्चा की। रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने संयुक्त बयान में साझे वैश्विक मुद्दों पर एकजुटता जाहीर की। इस संगठन का उद्देश्य अमेरिका के नेतृत्व वाले वैश्विक आदेश के विकल्प के रूप में मजबूत क्षेत्रीय सहयोग खड़ा करना है। सम्मेलन में सदस्य देशों ने एक सहयोगात्मक और बहुपक्षीय दृष्टिकोण अपनाने पर सहमति जताई।
भारत-चीन सीमा प्रबंधन पर सहमति
एससीओ शिखर सम्मेलन में मोदी ने विशेष प्रतिनिधियों के बीच हुए भारत-चीन सीमा प्रबंधन समझौते को भी महत्व दिया। इसमें दोनों देशों के सैनिकों के बीच विवाद क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के उपाय शामिल हैं। साथ ही, दोनों देशों ने कश्मीर में कैलाश मानसरोवर यात्रा के पुनः संचालन और पर्यटन बढ़ाने के कदमों की घोषणा की।
सांस्कृतिक और अनुष्ठानिक सादर स्वागत
चीन में प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत हुआ, जिसमें भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य प्रस्तुत किया गया। साथ ही चीनी कलाकारों द्वारा संगीत व नृत्य के माध्यम से भारत-चीन मित्रता को प्रदर्शित किया गया। भारतीय डायस्पोरा ने भी तस्वीरों और नारों के साथ मोदी का सम्मान किया।
पाठकों के लिए विश्लेषण:
यह दौरा और सम्मेलन भारत-चीन के बीच वर्षों से चले आ रहे तनाव की स्थिति में एक स्पष्ट ‘थॉ’ प्रतीत होता है। गलवान घाटी में हुई टकराव के बाद दोनों देशों के राजनयिक स्तर पर कई प्रयास हुए थे, जो अब धीरे-धीरे परिणाम दे रहे हैं। दोनों देशों की बढ़ती आर्थिक ताकतें विश्व व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं और यह स्पष्ट है कि शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व तथा सहयोग का माहौल दोनों के हित में है।
एससीओ में भारत की भागीदारी उसे वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनाती है, जबकि चीन की अध्यक्षता संगठन को उसकी वैश्विक भूमिका में बढ़ावा देती है। यह सम्मेलन द्विपक्षीय सीमाओं को पाटने के अलावा पारंपरिक और नये खतरे जैसे आतंकवाद, आर्थिक प्रतिबंध, और वैश्विक अस्थिरता से निपटने का मंच भी है।
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