ज्ञान भारतम पोर्टल : भारत की प्राचीन पांडुलिपियों के सरंक्षण हेतु AI-आधारित डिजिटल क्रांति | 14 सितम्बर 2025
प्राचीन ज्ञान विरासत के लिए टेक्नोलॉजी-ड्रिवन ‘Gyan Bharatam’ पोर्टल लॉन्च, Manuscript सरंक्षण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग व युवा शक्ति का योगदान
14 सितम्बर 2025, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘Gyan Bharatam’ के अवसर पर ‘Gyan Bharatam Portal’ लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य भारत की प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण और वैश्विक सरंक्षण है। यह पोर्टल देश की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक ज्ञान-संपदा और विज्ञान, साहित्य, गणित, आयुर्विज्ञान, ज्योतिष, कला तथा वास्तुशास्त्र जैसे विषयों की करोड़ों दुर्लभ पांडुलिपियों को दुनिया के सामने लाने का सपना साकार करता है.
सरकार के मंत्रालयीय आंकड़ों के अनुसार, भारत में 5 से 10 मिलियन से अधिक पांडुलिपियाँ हैं, जो लगभग 80 भाषाओं—संस्कृत, प्राकृत, पंजाबी, तेलुगू, कन्नड़, तमिल, बांग्ला, मलयालम आदि—में संग्रहीत हैं। मोदी जी ने कहा कि “यह संग्रह भारत की एकता में विविधता की मिसाल है और हमारे पूर्वजों की ज्ञान-साधना की गवाही देता है।”
टेक्नोलॉजी व नवाचार की भूमिका
Gyan Bharatam Portal पर डिजिटल आर्काइविंग में खास तौर पर AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का इस्तेमाल किया गया है, जिससे प्राचीन ग्रन्थों का अनुवाद, विश्लेषण तथा बहुभाषी शोध तेज़ी से किया जा सकेगा. साइट पर सभी पांडुलिपियाँ multi-lingual, searchable व सुरक्षित रूप में सार्वजनिक की जाएँगी। यह टेक्नोलॉजी भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देती है, जिससे सांस्कृतिक व क्रिएटिव इंडस्ट्री में डेटा-बेस्ड इनोवेशन को प्रेरणा मिलती है, जिसका वैश्विक स्तर पर $2.5 ट्रिलियन मूल्यांकन है.
अंतरराष्ट्रीय सहयोग
इस मिशन के तहत थाईलैंड व वियतनाम की यूनिवर्सिटियों के साथ साझेदारी की गई है, जहाँ पाली, लाना, चाम जैसी भाषाओं में पांडुलिपियाँ पढ़ने-समझने और शोधकर्ता प्रशिक्षित किए जा रहे हैं। हाल ही में भारत ने मंगोलिया व रूस के मठों को Mongolian Kanjur की प्रतियाँ भी उपलब्ध कराई हैं.
युवाओं की भागीदारी
प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के युवाओं से इस अभियान में सक्रिय सहयोग की अपील की, जिससे भविष्य के शोधकर्ता, विद्यार्थी व टेक्नोलॉजी-स्नातक भारत की जड़ों को पुनः खोजने, प्रमाणित करने व समूचे विश्व को उपलब्ध करवाने में तेजी लाएँगे। सम्मेलन में 70% से अधिक प्रतिभागी युवा थे, जो डिजिटल समीक्षा, AI रिसर्च और सांस्कृतिक संरक्षण में रुचि रखते हैं.
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