अगस्त 2025 में भारत की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 2.07% रही, जो जुलाई 2025 के 1.92% से 0.15% अधिक है। यह आंकड़ा वर्ष 2025 के शुरुआती महीनों से तुलना करने पर धीरे-धीरे बढ़ती महंगाई की झलक देता है। हालांकि, यह दर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के निर्धारित लक्ष्य बैंड 2-6% के बीच बनी हुई है, जिससे अर्थव्यवस्था में महंगाई नियंत्रण की तस्वीर साफ दिखाई देती है। यह वृद्धि मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों में महंगाई के तेज होने के कारण हुई, जहां दर 2.47% तक पहुंच गई, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई 1.69% रही। खाद्य महंगाई दर हालांकि, अगस्त में -0.69% रिकॉर्ड हुई, जो पिछले महीने के मुकाबले 107 बेसिस पॉइंट्स बढ़ी है।
1. अगस्त 2025 में महंगाई दर का आंकड़ा और ट्रेंड
पिछले कुछ महीनों में महंगाई दर 1.8% से 2.07% के बीच हल्की बढ़ोतरी दिखा रही है। पिछले साल के मुकाबले यह अभी भी कम है, जब अगस्त 2024 की महंगाई 4.5% के करीब थी। इस समय की महंगाई दर कम रहने का कारण खाद्य वस्तुओं के दामों में स्थिरता और उत्पादन बढ़ना है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रमुख वस्तुओं जैसे सब्जियों (विशेषकर आलू, टमाटर), मांस और मछली के दामों में वृद्धि के चलते खाद्य महंगाई में उछाल आया। शहरी क्षेत्रों में तेल-चर्बी, पर्सनल केयर आइटम और अंडे की कीमतों में भी तेजी हुई।
2. महंगाई वृद्धि के मुख्य कारण: ईंधन, खाद्य वस्तुएं और सेवाएं
अगस्त में ईंधन और परिवहन सेक्टर के दामों में करीब 1.4% की बढ़ोतरी देखी गई, जो मुख्य वजह बनी। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ी हैं। इसके अलावा रसोई गैस (LPG) कीमतों में भी हल्की तेजी आई है।
खाद्य वस्तुओं की बात करें तो, अनाज, दाल, और ताजा सब्जियों की कीमतें स्थिर रहीं, कुछ फलों के दामों में मामूली उतार-चढ़ाव हुआ। सीमित बारिश और उत्पादन की अच्छी स्थिति की वजह से खाद्य महंगाई नियंत्रण में है।
सेवाओं के क्षेत्र में भी महंगाई करीब 5% के आसपास बनी रही, खासकर स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है।
राज्यवार महंगाई के प्रमुख आंकड़े
– केरल: 6.71% महंगाई दर के साथ शीर्ष पर, खासकर जरूरी वस्तुओं और सेवाओं में बढ़ोतरी के कारण।
– लक्षद्वीप: 6.28%, रसद और आपूर्ति श्रृंखला समस्याओं के चलते महंगाई।
– गोवा: 5.16%, पर्यटन क्षेत्र के पुनरुद्धार से मांग बढ़ी, जिससे कीमतें ऊपर गईं।
– पंजाब: 4.67%, कृषि उत्पादन के उतार-चढ़ाव का असर।
– जम्मू-कश्मीर: 4.48%, उच्च परिवहन लागत के कारण महंगाई ज्यादा।
इसके अलावा हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, और केरल जैसे राज्यों में भी महंगाई दर राष्ट्रीय औसत से ऊपर रही।
3. RBI की नीति और महंगाई नियंत्रण के उपाय
RBI ने ब्याज दरों को स्थिर रखा है, पर जरूरत के अनुसार सख्ती या ढील देने की नीति जारी रखी है ताकि मांग और आपूर्ति दोनों में संतुलन बना रहे। RBI ने लगातार लक्षित महंगाई नियंत्रित रखने की कोशिश में कड़ी नीतियां अपनाई हैं।
सरकार भी आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त स्टॉक और कैजुअल सपोर्ट दे रही है, जिससे महंगाई की तेज़ी को रोका जा सके।
4. महंगाई का आम उपभोक्ता और अर्थव्यवस्था पर असर
2.07% की महंगाई दर आम घरेलू बजट के लिए अनुकूल मानी जा रही है। हालांकि पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से परिवहन और रोजमर्रा के खर्चों पर थोड़ा दबाव पड़ा है।
जब महंगाई बहुत कम होती है तो विकास धीमा पड़ता है, और बहुत अधिक होती है तो खर्च बढ़ जाता है। इस संतुलित स्तर पर कांटों के बीच आर्थिक स्थिरता बनी रहती है।
बढ़ी हुई महंगाई से बचाव के लिए वित्तीय योजनाओं में परिवर्तन, बचत को बढ़ावा और उत्पादन क्षमता को मजबूत करना जरूरी होगा।
5. भविष्य की संभावनाएं और विशेषज्ञों की राय
आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर तेल के दाम स्थिर रहेंगे तो सरकार और RBI महंगाई को नियंत्रण में रख सकेंगे। महामारी के बाद की रिकवरी और वैश्विक आर्थिक दबावों के बीच यह बढ़ती महंगाई सतर्कता का विषय है।
इस साल के अंत तक महंगाई 2.5% से ऊपर नहीं जाएगी, लेकिन अनिश्चित वैश्विक आर्थिक हालात से भविष्य में कुछ उतार-चढ़ाव हो सकता है।
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