May 23, 2026 |
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SCO समिट 2025 में भारत की बड़ी जीत: आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता और कड़ी कार्रवाई

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SCO समिट 2025: आतंकवाद के खिलाफ भारत की बड़ी जीत का विश्लेषण

1 सितंबर 2025 को चीन के तियानजिन शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 25वें शिखर सम्मेलन में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी जंग को एक वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत किया। इस समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन न केवल भारत की कूटनीतिक ताकत को दर्शाता है, बल्कि आतंकवाद, कट्टरपंथ, और आतंक-वित्तपोषण के खिलाफ SCO सदस्यों की साझा प्रतिबद्धता की प्रतीक भी है।

SCO में आतंकवाद के खिलाफ भारत का स्पष्ट रुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने SCO बैठक में आतंकवाद को मानवता के लिए सबसे गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद न केवल भारत, बल्कि सभी देशों की शांति, सुरक्षा और विकास के लिए चुनौती हैं। मोदी ने पहलगाम हमले को वैश्विक आतंकवाद का घिनौना रूप बताया और इसे केवल भारत बल्कि मानवता पर हमला करार दिया।

मोदी ने आतंकवाद के किसी भी रूप और समर्थन को अस्वीकार्य माना और SCO देशों से आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने आह्वान किया। उन्होंने आतंक-वित्तपोषण रोकने और कट्टरपंथ के खिलाफ ठोस कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया।

पहलगाम हमले और भारत की प्रतिक्रिया
2025 के अप्रैल में पहलगाम में हुआ आतंकवादी हमला SCO समिट की मुख्य चर्चा बना। प्रधानमंत्री मोदी ने इस हमले में शहीद हुए जवानों और पीड़ित परिवारों का स्मरण किया और इसे आतंकवाद के सबसे बर्बर रूप में बताया। SCO के साझा घोषणा-पत्र में भी पहलगाम हमले की कड़ी निंदा की गई, जो भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता है।

इस हमले पर पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष रूप से घेरा गया, जहां मोदी ने बिना नाम लिए आतंकवाद के खुले समर्थन पर सवाल उठाए। इस कदम ने पाकिस्तान को विश्व स्तर पर सख्त संदेश दिया कि आतंकवाद के प्रति कोई रियायत नहीं होगी।

आतंक-वित्तपोषण के खिलाफ भारत की पहल
भारत SCO की Regional Anti-Terrorist Structure (RATS) के माध्यम से आतंक-वित्तपोषण का पता लगाने और रोकने में अगुवा भूमिका निभा रहा है। मोदी ने इस क्षेत्रीय संगठन के जरिये अल-कायदा और उससे जुड़े आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ साझा व्यापक सूचना अभियान का नेतृत्व करने की बात रखी।

यह पहल आतंकवाद को वित्तीय रूप से कमजोर करने और कट्टरपंथी तत्वों की आर्थिक सहायता पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल दक्षिण एशिया बल्कि पूरे एशिया में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

शंघाई सहयोग संगठन में भारत की कूटनीतिक मजबूती
SCO के प्रतिभागी नेताओं, जिनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ भी शामिल थे, के बीच भारत का दबदबा साफ नजर आया। मोदी ने आतंकवाद मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर अलग-थलग किया।

एससीओ के साझा बयान में भारत के सुरक्षा हितों की पुष्टि और आतंकवादी हमलों की कड़ी निंदा दर्शाती है कि भारत के दृष्टिकोण को अन्य सदस्य देशों ने समर्थन दिया है। इससे भारत की क्षेत्रीय कूटनीति और सुरक्षा नीतियों को वैश्विक समर्थन मिला।

आतंकवाद पर वैश्विक तथा क्षेत्रीय एकता की अहमियत
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बैठक में स्पष्ट कहा कि आतंकवाद एक वैश्विक चुनौती है और इसके खिलाफ भारत ने सदैव एकजुटता पर जोर दिया है। उन्होंने SCO सदस्यों से आतंकवाद, कट्टरपंथ, और साइबर आतंकवाद के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने का आग्रह किया।

भारत की इस अपील ने एससीओ को न केवल सुरक्षा संगठन के रूप में मजबूत किया बल्कि यह दिखाया कि भारत आतंकवाद से लड़ाई में विश्व समुदाय के लिए भरोसेमंद साथी है।

SCO समिट में आर्थिक और रणनीतिक पहलें
SCO शिखर सम्मेलन में चीन ने सदस्य देशों को दो अरब युआन (करीब 281 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की ग्रांट देने की घोषणा की, जो क्षेत्रीय विकास में सहयोग को दर्शाता है। पीएम मोदी ने SCO को “सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी और ऑपॉर्चुनिटी” वाला मंच बताया, जो सभी सदस्यों के लिए अवसरों और सुरक्षा का बुनियादी आधार है।

भारत ने इस मंच को आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी लड़ाई, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना। इस समिट में भारत की भूमिका से क्षेत्रीय स्थिरता में वृद्धि की उम्मीद है।

निष्कर्ष
SCO 2025 समिट में भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की जीत कूटनीतिक, रणनीतिक, और नैतिक तौर पर अत्यंत महत्वपूर्ण रही। प्रधानमंत्री मोदी के स्पष्ट और कट्टरपंथविहीन दृष्टिकोण ने भारत को ना सिर्फ आतंकवाद विरोधी आंदोलन में अग्रणी बनाया बल्कि दक्षिण और मध्य एशिया में भारतीय प्रभाव को भी मजबूत किया है।

पूर्वी एशिया के इस मंच पर भारत की यह सफलता पाकिस्तान जैसे आतंक समर्थित देशों के लिए कड़ी चेतावनी है। यह SCO के सदस्य देशों को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर कानूनी, वित्तीय और सामरिक रूप से लड़ने के लिए प्रेरित करता है।

भविष्य में इस तरह की वैश्विक एकता से न केवल भारत बल्कि पूरी मानवता आतंकवाद से राहत पा सकेगी। भारत इस लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा, जो विश्व शांति के लिए आवश्यक है।

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