संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई 2025 से शुरू होकर 21 अगस्त 2025 तक चला। कुल 32 दिनों में 21 बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें से 12 अगस्त से 18 अगस्त तक मध्य-सत्र अवकाश रहा। संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शन और व्यवधान के कारण कई बार स्थगन हुआ, जिससे संसद की उत्पादकता प्रभावित रही। लोकसभा की उत्पादकता 31% और राज्यसभा की 39% रही। हालांकि, इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए और कई मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
प्रमुख विधेयक और कानून
इस सत्र में कुल 14 सरकारी बिल लोकसभा में प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 12 लोकसभा और राज्यसभा दोनों में पारित हुए। महत्वपूर्ण बिलों में शामिल हैं:
ऑनलाइन गेमिंग प्रोत्साहन और विनियमन विधेयक 2025: यह बिल डिजिटल गेमिंग उद्योग की शूटिंग और नियमबद्धता सुनिश्चित करता है।
आयकर (संशोधन) विधेयक 2025: कर व्यवस्था में बदलाव और सुधार के लिए।
राष्ट्रीय खेल संचालन विधेयक 2025: खेल क्षेत्र के प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के लिए।
पोस्ट और शिपिंग से जुड़े पांच विधेयक: पोर्ट्स प्रबंधन में सुधार के उपाय।
खनन एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2025।
दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक और जन विश्वास (संशोधन) विधेयक को चयन समिति के पास भेजा गया।
संविधान के महत्वपूर्ण संशोधन जैसे 130वां संशोधन, केंद्रशासित प्रदेश शासन संशोधन और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन संशोधन बिल को संयुक्त समिति को सौंपा गया।
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को छह माह के लिए बढ़ाया गया।
राज्य बजट और विनियोग विधेयक भी पारित हुए।
प्रमुख चर्चाएं और राजनीतिक गतिरोध
संसद में आतंकवाद और ऑपरेशन सिंदूर जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर गहन चर्चा हुई। लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर 18 घंटे 41 मिनट तक चर्चा की गई, जिसमें 73 सांसदों ने भाग लिया। हालांकि राजनीतिक टकराव और व्यवधान के चलते कई महत्वपूर्ण मुद्दे चर्चा के दौरान अधूरे रह गए। विपक्षी दलों ने बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। प्रश्नकाल में नियोजित वैधानिक बाधाओं के कारण भारी व्यवधान हुआ और केवल 55 प्रश्नों का ही मौखिक उत्तर दिया जा सका। इसके परिणामस्वरूप लोकतंत्रिक प्रक्रियाओं और जनता के प्रति जवाबदेही पर सवाल उठे।
विकास परियोजनाएं और नेतृत्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सत्र के दौरान बिहार और पश्चिम बंगाल में 18,200 करोड़ रुपयों से अधिक विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों पर भी संसद में विशेष चर्चा की गई, जिसे प्रधानमंत्री ने विकसित भारत 2047 योजना के तहत महत्व दिया। संसद अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यशैली में व्यवधानों और लोकतांत्रिक गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
संसद सत्र की निष्पादन समीक्षा
कुल 419 तारांकित प्रश्न सदन में शामिल किए गए थे।
कुल तनाव और व्यवधान के कारण पहले निर्धारित 120 घंटे चर्चा के बजाए लगभग केवल 37 घंटे ही कार्य हुआ।
राज्यसभा और लोकसभा दोनों में कई बार स्थगन हुआ।
लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली में सुधार के लिए स्पीकर और अध्यक्ष द्वारा कड़ी टिप्पणियां की गईं।
विपक्ष के विरोध के बावजूद महत्वपूर्ण विधेयक पारित करने में सफलता मिली।
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