सीतापुर दरी उद्योग की समस्या पर विस्तृत रिपोर्ट
सीतापुर का दरी उद्योग अपने समय का प्रमुख औद्योगिक केंद्र रहा है और आज भी यह जिले की आर्थिक और सामाजिक संरचना का अहम हिस्सा है। लगभग दो लाख बुनकरों तथा कई फैक्ट्रियों पर निर्भर यह उद्योग सदियों पुराना है। इसके बावजूद, हाल के वर्षों में इस उद्योग को कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे यहां के व्यवसायी, मजदूर और पूरे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
अमेरिकी टैरिफ का बड़ा झटका
सबसे बड़ी समस्या अमेरिकी सरकार द्वारा भारतीय दरी उत्पादों पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का है। पिछले कुछ महीनों में अमेरिका ने लगातार बढ़ती दरों से टैरिफ लगाया है, जो पहले 25 प्रतिशत था और अब 50 प्रतिशत पहुंच गया है। अमेरिका में दरी उद्योग का कुल कारोबार करीब 50 करोड़ रुपये का है, जिसमें 70 प्रतिशत हिस्सा भारत विशेषकर सीतापुर का दरी उद्योग था। इस भारी टैरिफ के कारण निर्यात पर भारी संकट छा गया है।
इसके परिणामस्वरूप एक प्रमुख निर्यातक का 10 करोड़ रुपये का ऑर्डर रुक गया है, और अन्य निर्यातक भी कारोबार बंद होने के कगार पर हैं। इससे करीब दो लाख बुनकरों समेत पूरे उद्योग में मंदी छा गई है। इस आर्थिक दबाव के कारण कई दरी निर्माण कारखाने बंद हो गए हैं, जिससे मजदूरों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ गई है।
जीएसटी, लागत और कच्चे माल की समस्या
दूसरी बड़ी समस्या जीएसटी में फंसना और कच्चे माल की बढ़ती कीमतें हैं। अनेक छोटे-छोटे बुनकर और फैक्ट्री संचालक जीएसटी की पेचीदगियों और कराधान को झेल नहीं पा रहे हैं। पहचाना न जाने वाला ये उद्योग कराधान की भारी मार के कारण कमजोर अवस्था में है। इसके अलावा, ऊन धागे की कमी और उसकी महंगाई ने उत्पादन लागत को बढ़ा दिया है, जिससे प्रतिस्पर्धा में और गिरावट आई है।
जलजमाव और बुनकरों के रोजगार का संकट
औद्योगिक क्षेत्र खासतौर पर सराय मलुही क्षेत्र में फर्नीचर, दरी और हथकरघा उद्योग के लिए जलजमाव बड़ी समस्या बन रहा है। डंपिंग ग्राउंड व आसपास के नालों में पानी जमा होने से इन इलाकों में उत्पादन बाधित होता है, माल असुरक्षित रहता है और परिवहन बाधित होता है। जिलाधिकारी अभिषेक आनंद ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए निस्तारण के आदेश दिए हैं, लेकिन समाधान अभी तक अल्पकालिक रहा है।
निर्यात और बाजार का संकट
दरी उद्योग के लिए अमेरिका मुख्य निर्यात बाजार था, लेकिन अब निर्यातक दूसरे देशों में भी मार्ग तलाश रहे हैं। हालांकि, नए बाजार विकसित करना कठिन कार्य है क्योंकि वहां पहले से स्थापित प्रतिस्पर्धी मौजूद हैं और लागत एवं गुणवत्ता का दबाव है। इसके अलावा वैश्विक मांग में कमी और भारतीय उत्पाद की कीमत अधिक होने से निर्यात प्रभावित हो रहा है।
सरकारी योजनाएं और सहायता
सीतापुर का दरी उद्योग एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल है, जिसकी मदद से उद्योग को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, क्लस्टर डेवलपमेंट योजना जैसी कई सरकारी योजनाएं हैं, लेकिन उनका लाभ छोटे और मध्यम उद्यमी तक पहुंचने में बाधाएं हैं। निवेश मित्र पोर्टल, निर्यात प्रोत्साहन और मार्केटिंग में भी सुधार आवश्यक है।
स्थानीय व्यापारियों और उद्योगपतियों का बयान
व्यापारी अजय अवस्थी के अनुसार, 90 प्रतिशत लोग हथकरघे पर दरी बुनाई करते हैं, जबकि केवल 10 प्रतिशत पावरलूम का प्रयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग में आधुनिक तकनीक और वित्तीय सहायता की कमी नई पीढ़ी को आकर्षित नहीं कर पा रही। कई युवा इस व्यवसाय को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में रोजगार की तलाश कर रहे हैं।
समाधान के लिए सुझाव
निर्यात बाजार में नए देशों की खोज और वहां भारत की दरी की ब्रांडिंग।
जीएसटी और अन्य टैक्स से राहत के लिए सरकार से अनुरोध।
जलजमाव की समस्या के स्थायी निपटान हेतु बेहतर जल निकासी प्रणाली का निर्माण।
कच्चे माल की सस्ती उपलब्धता और तकनीकी सहायता।
रोजगार सृजन के लिए कौशल विकास और युवाओं को उद्योग में जोड़ना।
सरकारी योजनाओं का अधिक प्रभावी प्रचार और क्रियान्वयन।
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