श्रावण मास समाप्ति पर है| भगवान भोलेनाथ की कृपा स्वरूप ये रक्षाबंधन का पर्व समूचे विश्व में परम अलौकिकता के साथ मनाया जा रहा है| सभी सनातनी इस उत्सव को मनाते हुए गौरान्वित हैं| भाई बहनों का यह त्यौहार भारतीय प्राचीनता का गौरव है| भारत भूमि समस्त भावनाओं का उद्गम है| इस महाव पर्व में जब बहन भाई की रक्षा तथा सर्व कल्याण की भावना के साथ उसकी कलाई पर राखी बांधती है और भाई बहन को रक्षा का वचन देता है उस क्षण में सृजित ये महान कल्याणकारी भावनाएं इस श्रष्टि को मातृत्व तथा भ्रातृत्व के भावों से सींचित करती है| समूचा विश्व आनंद विभोर हो जाता है| भ्रष्ट हो चुके कलियुग के इस दौर में भाइयों को कर्तव्यबोध कराने वाला यह पर्व बहुत महान भारतीय पर्व है| जिस समयकाल में एक राखी बंधती है उस क्षण में करोड़ों दुर्योधनों की पापमयी आँखों की ज्योति प्रतिबंधित हो जाती है| ऐसे पवित्र तथा शक्तिशाली पर्व को जब भारत देश का विश्वव्यापी परिवार उत्सव के साथ मनाता है तब इस श्रष्टि पर छाया पाप का घना अंधकार क्षण भर में समाप्त हो जाता है तथा श्रष्टि कर्तव्यपथ पर चलते हुए सद्भावरूपी प्रकाश में स्वयं को हर्षित तथा पुलकित अनुभव करती है| रक्षा बंधन के शुभ मुहूर्त में जब विश्वभर में कर्तव्य की भावना का सृजन होता है उस क्षण में इस कलिकाल में चल रहे अगणित धर्मयुद्धों का निर्णय धर्म के पक्ष में हो जाता है| इस पर्व की जानकारी देते हुए कई विद्वान आपको रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्तों के बारे में बता रहे होंगे| मैं इस लेख के माध्यम से इस देश के समस्त भाइयों को बताना चाहता हूँ कि कलियुग के इस समय में बहनों पर सर्वाधिक संकट है| राखी शुभ मुहूर्त में ही बंधे ये सभी के लिए संभव नहीं है क्योंकि समयरेखा पर किसी का भी नियंत्रण नहीं है| परन्तु जब भी इस देश तथा विश्व की कोई भी बहन किसी आपातकाल में हो तब अपने हाँथ में बंधी राखी के प्रति कर्तव्यनिष्ठ होकर उस बहन का किसी भी स्तर का सहयोग तथा बहन की रक्षा जरुर करियेगा| सभी भाइयों को परम हर्ष के साथ आश्वश्त भी करना है कि यदि भाइयों के हिस्से में बहनों से अधिक दुःख न आया तो इस श्रष्टि के दुखों का उद्धार संभव नही है| सनातन की हर कथा इस कथन का स्वयं ही श्रेष्ठ उदाहरण है| तो समस्त को संदेशित करना है कि परम उल्लास के साथ रक्षा बंधन के त्यौहार को मनाएं| जैसे श्रावण मास को दो माह मनाया है वैसे ही रक्षा बंधन को दो दिनों तक मनाएं! हर्षित हों! कलाई में बंधी राखी के प्रति अधिक कर्तव्यनिष्ठ हों तथा अपने समक्ष किसी भी बहन का अहित न होने देने का प्रण लें! यदि आप किसी बहन की रक्षा करते हैं तो आप स्वयं भगवान श्री कृष्ण समान हैं जिनसे दुर्भाग्य सदैव ही परास्त होता है! जय सनातन! जय भारतवर्ष! जय रक्षाबंधन!
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